उन लोगों के लिए दो शब्द; जो मुझ जैसे विचार रखने वालों को भीड़ बनकर बस गालियाँ देना जानते हैं।
बच्चों; तुम लोग जानते हो, कि मेरे या मुझ जैसे तथाकथित बुद्धिजीवियों के पास केवल ज्ञान ही नहीं बल्कि मृगमरीचिकाई शब्दों का भण्डार भी होता है। सोचो, तुम जो उन्हें गालियाँ देते हो, अगर वापस पलट कर वो भी तुम लोगों को गाली दे तो? क्या तुम उसके अथाह शाब्दिक भण्डार का थाह ले सकोगे? उसके अर्थातों को समझ सकोगे? कदाचित् मुझे ऐसा नहीं लगता कि तुम लोगों में इतनी बुद्धि है। खैर, वो गाली कभी नहीं देंगे। जानते हो क्यों? बताता हूँ। वो गाली इसीलिए नहीं देंगे, क्योंकि गाली कुंठित और बीमार मानसिकता की निशानी होती है। भले तुम लोग कुंठित हो या बना दिये गये हो, जिसका तुम्हें भान नहीं है। पर यह तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग कुंठित नहीं है। बच्चों, ये बुद्धिजीवी वर्ग जो है न, वो तुम्हारी माँ-बहनों को अपनी माँ-बहन मानता है। इसलिए वो तुम जैसे झंडूबाम और चिरकूट लोगों को हँस कर इग्नोर कर देता है। तुम सब उनके लिए बस जोकर जैसे हो और कुछ नहीं।
क्या तुम लोगों में इतनी साहस है, कि तुम दूसरों की माँ, बहनों के लिए आवाज बुलंद कर सको? नहीं। क्योंकि वो तुम्ही लोग हो, जिसके कारण भारत में कोई भी महिला खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पाती। वो तुम्ही लोग हो, जिसके लिए महिलाएँ सिर्फ एक गोश्त का टुकड़ा होती हैं। फिर वो महिला तुम्हारे मोहल्ले की हो या फिर कश्मीर की। मेरे बुद्धिहीन बंधुओं, यह तथाकथित बुद्धिजीवी ही है, जो कठुआ, उन्नाव जैसे एक असहाय बलात्कार पीड़िता के लिए अपनी आवाज उठाता है। उसे न्याय दिलाने के लिए लड़ता है। और यकीन रखो, यदि कल तुम जैसा कोई मानसिक दिवालियापन से पीड़ित रईश आततायी तुम्हारी माँ या बहन का बलात्कार कर दे और कानून उस पर अपनी आँखें मूँद ले तो यही बुद्धिजीवी वर्ग होगा, जो उसके लिए अपनी आवाज़ बुलंद करेगा। और हाँ! तुम भेड़ बकरियों की फौज तब भी हिन्दू-मुस्लिम और दलित करने के लिए आ जाना। गाली देने आ जाना। वो फिर हँस कर इग्नोर कर देंगे। तब तक के लिए, अपनी माताजी को मेरा प्रणाम कहना और बहन को स्नेह 😊
