जो प्रेम करती हैं, वो अच्छी लड़कियां नहीं होती। तुम अच्छी लड़की बनना, इसीलिए प्रेम मत करना।
गुरुवार, 28 जनवरी 2021
वे दिन... और
हुआ क्या है, मालूम नहीं। बुख़ार, जुकाम, बेहोशी रह-रहकर आती है। यादाश्त भी छीन होती जा रही है। चंद दिनों पहले एक डॉक्टर ने मियाँदी बुख़ार होने की बात कही थी। दवा खा कर भी बुख़ार नहीं गया तो एक एमबीबीएस फ्रेंड से बात करनी पड़ी। उसने अपने पैथालॉजी में जाँच की तो नतीजा कुछ भी नहीं निकला। बाद में पता चला, कि पहले वाले डॉक्टर साहब पैथालॉजी से मिले हुए थे। माने उनकी अपनी ही पैथालॉजी थी। ऐसा नहीं है, कि मुझे कभी मियाँदी की शिकायत नहीं रही। पर जब भी यह बुख़ार आया, सोलह इंजेक्शन के बाद ही गया। इन्हीं सब के बीच आज सुबह थोड़ी उल्टियाँ हुई। मन में डर था, कि खून न निकल जाए। तीन महीने पहले ही तो खून बहा था। मुँह से। ऐसे ही। तुरंत मुम्बई भागना पड़ा था। टेस्ट के बाद जब रिपोर्ट निगेटिव निकली तो जान में जान आयी। तभी लॉकडाउन नहीं हुआ था। आने-जाने के सारे रास्ते खुले हुए थे। फ्लाइट्स की सुविधा थी। पर अब ये सारी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। जा तो सकता हूँ, पर डर लगता है, कि कोरोना ना लेता आऊँ। मुम्बई में रहने वाली एक माँ कहती है, मुम्बई मत आ। यहाँ की हालत बहुत खराब है। व्हाटस्अप से दवा मंगवा ले। लेकिन डॉक्टर साहब ने साफ कहा है, कि फिर से जाँच करनी होगी। और इसके लिए आप का आना जरूरी है। इसी सोच-विचार के कारण मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। फिर कुछ लोग हैं जो केवल दुख ही देना जानते हैं। इस बारे में डॉक्टर से कहता हूँ तो वे कहते हैं, संजीव! कुछ दिन लिखने-पढ़ने और मोबाइल फोन से दूरी बना लो। अब उन्हें कैसे कहूँ, कि दुख देने वाले बिना मोबाइल फोन के भी दुख देते हैं। फोन ना उठाओ तो सामने आ जाते हैं। झूठ-फूस का कहते हैं, कि मैं ठीक हूँ। ख़ुश हूँ। जबकि मेरी छठी इंद्रियाँ कहती हैं, भले ही ये झूठ बोल रही है पर तुम हँसना मत। हँसने से उसे दुख होगा। लगेगा, सच्चाई जानते हुए भी पूछता है। ढोंगी। परन्तु मुझे मालूम है, मैं क्यों नहीं कहता सच्चाई। क्योंकि उसके बाद की स्थिति संभालने लायक कूवत नहीं बची मेरे पास। अकेले में हँसता हूँ, ताकि बाद में हँसने का अफसोस ना रहे। कि जिस जीवन में सबसे ज्यादा कमीं हँसी की ही रही हो, कि उस जीवन में किसी के झूठ पर हँसना बनता भी नहीं है। कि जिस जीवन के पहले ढाई साल में ही माँ का साथ छूट जाए, कि उस जीवन में सुख़ का होना बनता भी नहीं है। खुशकिस्मत हैं वे लोग, कि जिनके जीवन में माँ की ममता लिखी होती है। खुशकिस्मत हैं वे लोग, कि जिनके ललाट पर काला टीका लिखा होता है।
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