गुरुवार, 25 जून 2020

बाल कविता


टिप-टिप करती बरसा आयी
साथ में कोल्ड फ्लू भी लायी
कोल्ड फ्लू से डरते हम सब
सावधान भी रहते हम सब
मम्मी करती सेवा हर दम
पापा डांट पिलाते भरदम
डांट से डरकर हम छिप जाते
दादा जी हम को खूब बचाते
एक रोज़ जब बदरी छायी
बरसा की साइत बन आयी
बरसा रानी बड़ी चतुर थीं
वाणी में भी बड़ी मधुर थीं
हम सब ना थे चतुर सुजान
ना था हममें अल्प भी ज्ञान
लुका-लुका हम छत पर आये
उछल-कूद कर खूब नहाये
रात बदन पर आयी फीवर
सरदी से जीना हुआ दूभर
दादा जी डाक्टर बुलवाये
सुबह-शाम टीके लगवाये
डाक्टर ने दी नीली गोली
एक लाल एक पीली गोली
डाक्टर को आते हैं जादू-मंतर
जिससे फीवर हो जाते हैं छू-मंतर

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