मंगलवार, 16 जून 2020

मुम्बई को इस्तीफ़ा सौंपना था मेरे बच्चे, ज़िन्दगी को नहीं।

आपने बहुतेरे पढ़ा/सुना होगा, कि आत्महत्या न तो कायरता है और न ही बहादुरी। यह डिप्रेशन का नतीजा है। ऐसा कौन होगा, जिसे अपनी ज़िन्दगी से प्यार न हो। यहाँ इस बात को मैं गलत तो बिलकुल भी नहीं ठहराऊँगा। बल्कि हामी भरूँगा। लेकिन बात यहाँ न तो साहस की है और न ही कायरता की। न फायदे की है न नुकसान की। बात है तो ज़िन्दगी से थक जाने की। हार जाने की। आत्महत्या, यानि वह अदम्य साहसिक कार्य; जिसे अक्सर हम अपनी ज़िन्दगी को ख़तम करने के लिए करते हैं। आत्महत्या, यानि मजबूरन अपनी मौत का कारण आप ही बन जाना। आत्महत्या, यानि दुनियावी रीतियों से खिन्न होकर बिना अफसोस बरास्ते-नर्क चल पड़ना। आत्महत्या, यानि अपनी ज़िन्दगी से इस्तीफा दे देना। यानी सभी कष्टों से मुक्ति पाने का सबसे सरल तरीका। 
आत्महत्या को खुद से खुद की आजादी के पहल के रूप में देखा जा सकता है। जो जैसी ज़िन्दगी जीता है, उसकी सोच भी कमोबेश वैसी ही होती है। आत्महत्या करने वाले लोग भी कहीं न कहीं अपने जीवन से ऐसे अनुभव पाते हैं, जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते। और उस अनुभव के बाद उनके पास कोई और रास्ता नहीं होता। होता भी है तो उस कड़वे अनुभव के कड़वाहट में खो जाता है। आप सोच रहे होंगे; आत्महत्या ही क्यों? क्या उन्हें दूसरा रास्ता नहीं सूझता? शायद ऐसा इसलिए क्योंकि यह 'चट दवाई, पट राहत' जैसी है। अपने सभी कष्टों से हमेशा के लिए मुक्ति पाने का सबसे कारगर तरीका है।
लोग कहते हैं कि यह एक अवसाद है। ऐसे लोगों को फौरन डॉक्टर के पास जाना चाहिए। उनसे मैं कहना चाहूँगा, कि भाईसाहब; कुछ चीजों की दवाईयाँ नहीं होती। होती भी है तो वह दवाईयों से ठीक नहीं होती। कुछ चीजों की दवाईयाँ खुशियों के खिलखिलाहटों से भरी ओवरडोज होती है। और ऐसे लोग जिन्हें यह पता हो, कि इन हालतों में उसे क्या करना है तो वह आत्महत्या करेगा ही क्यों? यानि मैं सीधे-सीधे यह कहना चाहता हूँ, कि जो इतने होश में हो, कि डॉक्टर के पास चला जाए; वो आत्महत्या क्यों करेगा? 
ज़िन्दगी से सबको प्यार होता है। सब हँसना चाहते हैं। मुस्कुराना चाहते हैं। उड़ना चाहते हैं। दौड़ना चाहते हैं। प्रेम करना चाहते हैं। ज़िन्दगी को खुशी-खुशी जीना चाहते हैं। कोई मरना नहीं चाहता। लेकिन कभी-कभी लोगों को खुद से नफ़रत हो जाती है। हमें दूसरी चीजों से नफ़रत हो तो हम उबर जाते हैं। लेकिन खुद से नफ़रत हो जाए, तो कोई रास्ता नहीं सूझता, सिवाय इसके कि अपनी इहलीला समाप्त कर लें। मुझे नहीं पता कि आत्महत्या करने वाले लोग कायर होते हैं या साहसी। लेकिन इतना जरूर कहूँगा कि ज़िन्दगी को जीने का उन्हें हुनर नहीं आया। वो थक गये। हार गये। और हार कर दुनिया छोड़ गये। 

मुझे तुमसे हमदर्दी है डियर! मैं तुम्हे जितना जानता था, उससे तुम कायर कभी नहीं लगे। तुम लड़ते थे। जूझते थे। एक सामान्य व्यक्ति से अधिक जुझारूपन था तुममें। फिर भी तुमने यह कदम उठाकर साबित कर दिया, कि लोग थकते हैं। हारते हैं। कभी-कभी अपनी ज़िन्दगी से भी। मैं कभी नहीं जान पाया, न भविष्य में जान पाऊँगा, कि तुमने इतना बड़ा कदम कैसे उठा लिया। हम सब तुम्हारे इस तरह जाने से दुखी हैं। न केवल दुखी हैं, बल्कि हतप्रभ, सन्न हैं। और यह प्रार्थना करते हैं, कि तुम्हारी आत्मा को शांति मिले। 

ए-रस्सी! झूलने वाले से इतना तो पूछती 
ज़िन्दगी से क्यों तुझे आसान मर जाना लगा? 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

सफ़ेद फूल

सफ़ेद फूल शान्ति के प्रतीक माने जाते हैं। शान्ति के दिनों के प्रतीक माने जाते हैं। किन्तु इन सफ़ेद फूलों को सबसे अधिक दुख़द दिनों में ही याद...