लोग जिसे ईश्वर का नाम देते हैं, वो कुछ और नहीं बल्कि मानवता है। ईश्वर किसी उड़ती चिड़िया का नाम नहीं। यह सिर्फ और सिर्फ मानवतावाद का नाम है।
और ये, जो धर्म नाम के ज़हरीले विचार चहुँओर फैले हुए हैं; ये सच्चे अर्थों में मानवता रुपी पौधे के विकास पर बहुत बड़ा रोड़ा है। क्योंकि ईश्वर के रहते मानवतावाद कभी फल-फूल नहीं सकता। धर्म के रचनाकार, पाखण्डी धर्म गुरू और उनके ढोंगी चेले-चपाटे मानवता को किसी भी सूरते-हाल जीवित नहीं रहने देंगे। क्योंकि मानवतावाद के आस्तित्व में आ जाने से इनकी दुकानें जबरदस्त घाटे में चलने लगेंगी। और ये लोग इस नुकसान को सपने में भी नहीं सह सकेंगे। इसीलिए आये दिन ये चिल्लाते हैं-धर्म ख़तरे में है। ईश्वर ख़तरे में है। दरअसल ख़तरे में धर्म या ईश्वर नहीं, बल्कि इनकी दुकानें हैं। ये पाखण्डी जानते हैं, कि वे सारे अँधे-बहरे लोग, जो भैंस के पूँछ की तरह लहराते समर्थन में उनके पीछे-पीछे चल पड़ते हैं। वो मानवतावाद का असली चेहरा देख कर सुषुप्तावस्था से जाग गये और अपने कर्तव्यों का निर्वहन ठीक-ठीक करते हुए मजबूरों की मदद करने लगे तो वे भूखों मरने लगेंगे।
धर्म के ठेकेदार यूँ ही नहीं अफ़ीम के कारोबारी कहे जाते हैं।

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