तुमने कहा-"मैं तुमसे बेहद मुहब्बत करती हूँ।' क्या सचमुच? आह्! मैं तुम्हें बता नहीं सकता, कि यह सुन कर मुझे कितनी खुशी हुई थी। क्योंकि मेरी माँ के अलावे मुझसे किसी ने 'बेहद मुहब्बत' नहीं की। मुहब्बत यूँ तो बहुतों ने की; मगर सब आये, फायदे की झोली उठायी और चलते बने। जाहिर है, उनके जाते ही उनकी मुहब्बत भी उनके साथ ही चली गयी। फिर तुम आयी। एक भरोसा जगाया। तुम से मुहब्बत करने के बाद मैंने ये कभी नहीं सोचा था, कि एक दिन तुम भी अपनी मुहब्बत समेट कर चल दोगी। कितना आसान होता है ना, किसी की ज़िन्दगी से निकल कर जाना? बस; एक ऐसा बहाना चाहिए होता है, जिसे सुनकर सामने वाला कुछ-कुछ किंकर्तव्यविमूढ़ सा होकर रह जाए। ना कुछ बोल पाए। ना जाते को रोक पाये।
मैंने गुलाब कभी नहीं सूंघे थे। वो भी फुरसत में। तसल्ली से। कभी कॉफी नहीं पी थी। देसी ब्वॉयज़ की तरह बीयर पीता था। रेड लेबल वाइन पीता था। सड़ी गरमी में पसीने से तर होने के बावजूद चाय और सिगरेट को प्राथमिकता देता था। कड़ी धूप में छाँव देने वाले मेरे कुछ दोस्त भी थे। जो मुझे भाई कहते थे। तुम्हें क्या हक था, इन सारी चीजों को छुड़वाने का? कौन थी तुम; जो कहती थी-'प्लीज! मेरे खातिर तुम इन चीजों को नहीं छोड़ सकते? जवाब दो मेरी जान? तुम चुप क्यों हो?
तुमने सम्पर्क तोड़ा। मैं चुप रहा। तुमने बातचीत छोड़ी। मैं चुप रहा। तुमने गली छोड़ी। मैं चुप रहा। तुमने चैटअप छोड़ा। मैं चुप रहा। तुमने नम्बर बदले। मैं चुप रहा। तुमने फेसबुक छोड़ा। मैं चुप रहा। यहाँ तक कि तुम शहर भी छोड़ गयी। मगर मैं फिर भी चुप रहा। लेकिन अब चुप नहीं रह सकता मेरी जान। नहीं रह सकता अब चुप। क्योंकि भीतर कुछ दुख रहा है अब। बहुत दुख रहा है। दुख तो पहले भी रहा था, मगर सहन कर सकूँ; उस हद तक ही दुखता था। इन दिनों दिल में फोड़े उठ रहे हैं। दिल रह-रहकर हूकता है। कि तुम कितनी अदायगी से, कितनी बेहतरीन झूठ बोल लिया करती थी। यह याद कर-करके दिल खुद को कोसता है इन दिनों। कहो! तुमसे नफ़रत क्यों न किया जाए जाना? तुम्हें बेवफा, संगदिल क्यों न कहा जाए? कहो मेरी जान? तुम चुप क्यों हो?
आज जी भर दारु पी है मैंने। सिगरेट को रह-रह कर सुलगाया है। वो क्या है ना, मुहब्बत की लच्छेदार बातें करने वाली कोई महबूबा पास नहीं है। पास तो तुम भी नहीं हो। जो सिगरेट बुझा देती थी। दारु छुड़ा देती थी।
अब हर आतिश पर आवारगी का नाम होगा जाना। अब हर रात गजल में डूबी होगी। अब सुबह का सूरज दिन ढलने के बाद निकलेगा। और रात की शुरुआत होगी दो पैग हलक़ से उतरने के बाद। क्योंकि मुझे मुहब्बत है! मुझे मुहब्बत है जाना, मुझे तुमसे मुहब्बत है। कुछ कहती क्यों नहीं? कहो मेरी जान, तुम चुप क्यों हो?

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