“सुनो!"
“हाँ! कहो?"
“मुझे आज तक कोई लड़का पसंद नहीं आया? तुम बता सकते हो क्यों?"
“क्योंकि तुम्हे किसी में वो जादू नहीं दिखा; जो तुम्हारी रुह को झकझोर सके।"
“क्या मतलब? तुम्हे लगता है, कि मैं ख़ुद के लिए जादूगर ढूँढ़ रही हूँ?"
“नहीं! मेरा वो मतलब नहीं था। तुम्हारी आँखें उस जादूगर को तलाश रही हैं; जो तुम्हारी कलाकारी में तुमको न केवल मात कर दे; बल्कि हैरान कर दे।"
“तुम कहना क्या चाहते हो? मुझे ऐसी कोई भी कलाकारी कहाँ आती है?"
“आती है। तुम जब सिगरेट पीती हो तो धुओं का छल्ला बेहद खूबसूरती से बनाती हो। तुम्हे पसंद आयेगा वो बिंदास लड़का... जो फूँक दे सिगरेट, तो आसमान में गुलाबी रुई तैर जाएँ।"
“ओह! अब मुझे सारी बातें समझ आ गयीं। ये भी; कि मुझे आज तक कोई लड़का पसंद क्यों नहीं आया। ये भी, कि तुम जब फूँकते हो सिगरेट तो आकाश में रुई से बादल क्यों उमड़ पड़ते हैं। और ये भी, कि...
मैं तुम्हे खोने से इतनी डरती क्यों हूँ।"

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