सोमवार, 8 जून 2020

गिरगिट की अदमियत


1- अदमियत

मैं सर्वश्रेष्ठ हूँ 
ताल ठोकी है मैंने 
और चोर दरवाजे से 
पलायन की भी तैयारी है। 


2- सभ्यता

मुझे नफ़रत है ऊँचे माथों से 
ख़बरदार! सर झुका कर चलो
यह प्रेम किस चिड़िया का नाम है 
डाल दो पिंजरे में, मुसीबत पार करायेगी 


3- ठेकेदार 

और सुनो; छोटी जाति के अछूत शूद्रों 
ज़िन्दा चुनवा दूंगा 'हकूक' की बातें की तो 
भाग्य ऊपर लिखाता है, तुम मूर्ख क्या जानो
मंदिर अपवित्र किये तो खाल उधेड़ दूंगा। 


4- गिरगिट 

ए-ठकुराईन! हमारे कपड़े कहाँ रखी हो 
अरे वही, जो गिरगिटिया गुणों से लैस है 
दरअसल हम एक बड़े जलसे में जा रहे हैं 
जहाँ भाँति-भाँति के गिरगिट आने वाले हैं।

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